1. खुशबू कि तरह आया वो तेज़ हवाओं में मांगा था जिसे हमने दिन रात दुआओं में तुम छत पे नहीं आये में घर से नहीं निकला ये चाँद बहुत भटका सावन कि घटाओं में इस शहर में एक लड़की बिलकुल है ग़...
तेरी डोली उठी, मेरी मैय्यत उठी; फूल तुझ पर भी बरसे, फूल मुझ पर भी बरसे; फर्क सिर्फ इतना सा था, तू सज गई, मुझे सजाया गया; तू भी घर को चली, मैं भी घर को चला; फर्क सिर्फ इतना सा था, तू उठ के ग...