बेटे का दर्द और ईंन्सानियत
एक डॉक्टर को जैसे ही एक urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया. वो जितना जल्दी वहाँ आ सकते थे आ गए. वो तुरंत हि कपडे बदल कर ऑपरेशन थिएटर की और बढे. डॉक्टर को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए जिसका इलाज होना था. पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे, और चिल्लाने लगे.. "आखिर इतनी देर तक कहाँ थे आप? क्या आपको पता नहीं है की मेरे बच्चे की जिंदगी खतरे में है . क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती.. आप का कोई कर्तव्य है या नहीं ? ” डॉक्टर ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ कहा- “मुझे माफ़ कीजिये, मैं हॉस्पिटल में नहीं था. मुझे जैसे ही पता लगा, जितनी जल्दी हो सका मैं आ गया.. अब आप शांत हो जाइए, गुस्से से कुछ नहीं होगा” ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया. भला अपने बेटे की इस नाजुक हालत में वो शांत कैसे रह सकते थे… उन्होंने कहा- “ऐसे समय में दूसरों को संयम रखने का कहना बहुत आसान है. आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल रहा है.. अगर आपका बेटा इस तरह मर रहा होता तो क्या आप इतनी देर करते.. यदि आपका बेटा मर जाए अभी, तो आप शांत रहेगे? कहिये..” डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा- “किसी की मौत और जिंदगी ईश्...